Home » अवैध मुर्गा लड़ाई का खेल बदस्तूर हैं जारी पुलिस बनी मुकदर्शक
Uncategorized

अवैध मुर्गा लड़ाई का खेल बदस्तूर हैं जारी पुलिस बनी मुकदर्शक

धनबाद – अवैध मुर्गा लड़ाई का खेल बदस्तूर हैँ जारी पुलिस बनी मुकदर्शक,

मुर्गों की लड़ाई बैन होने के बावजूद कतरास के बरोरा थाना क्षेत्र के अंतर्गत मांदरा में लगा लाखो का मुर्गा लड़ाई में हो रही हैँ सट्टेबाजी स्टेबाजी में जा रही निरीह प्राणी की जान , स्थानीय थाना के पुलिस बना रहा मूकदर्शक। प्राप्त जानकारी के अनुसार बाघमारा अनुमंडल के बरोरा थाना क्षेत्र के अंतर्गत मांदरा स्तिथ बिच्छू पहाड़ी में हब्बा डब्बा, मुर्गा लड़ाई समेत कई अवैध खेल सट्टा मटका की तरह ही लोकप्रिय हो चुका है. खास कर मुर्गा लड़ाई का क्रेज इतना है कि इसमें इसकी तैयारी लोग बहुत पहले से शुरू कर देते हैं. हालांकि पुलिस इस खेल में शामिल होने वाले लोगों पर कड़ी कार्रवाई करती है. लेकिन इसके बावजूद, मंदरा के बिच्छू पहाड़ी में मुर्गा लड़ाई जैसे खेल का आयोजन होता रहता है. कभी मनोरंजन के रूप में खेला जाने वाला यह खेल अब जुआ का रूप ले चूका है. जहां पर एक-एक मुर्गे पर लाखों रुपये की बोली लगती है.जबकि अदालत ने कई साल पहले ही पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत इस पर प्रतिबंध लगा दिया था वहीँ मुर्गा के अखाड़े मे दांव आजमाने वाले लोगों के अपने नियम होते हैं। जो मुर्गों के संघर्ष मे अधिक दांव लगाता है, उसे मुर्गा अखाड़ा मैदान मे ही विशेष जगह दी जाती है। जबकि कम पैसा लगाने वाले लोगों को अखाड़ा मैदान में लगाये तार के घेरे के बाहर खड़े होना पड़ता है। मुर्गों की अनूठी लड़ाई में ग्रामीण 10 रुपये से लेकर हजारों रुपये की बोली लगाते हैं। एक दिन के बाजार में लाखो की बोली लग जाती है
मुर्गा लड़ाई से पहले मुर्गों के मालिक उन्हें खिला पिलाकर मजबूत बनाते हैं।जिससे की मुर्गों को भीड़ के बीच रहने की आदत लग सके, इसलिए पहले उन्हें बाजार में कई बार लाया जाता है फिर मुर्गों को मैदान मे उतारने से पहले उनको बिना हथियार बांधे आपस में लड़ाकर लड़ने की ट्रेनिंग दी जाती है। इससे कई मुर्गे लड़ाई के दौरान घायल हो जाने पर भी अंतिम सांस तक मुर्गे लड़ते रहते हैं।जबकि पशु पक्षी नियम क़ानून अधिनियम के तहत मुर्गा लड़ाई अवैध हैँ फिर भी लोग नहीं मानते हैँ और सट्टे की वजह से मुर्गे की बली चढ़ा देते हैँ हालांकि मुर्गा लड़ाई अवश्य बंद होनी चाहिए

मुख्य संपादक – अरुण कुमार

About the author

Arun Kumar

Add Comment

Click here to post a comment