मेरी बात — “अपना स्टारडम बचाने की होड़ “लेखक सह पत्रकार = ( अरुण कुमार ) = आज का यह टॉपिक काफी चर्चित होने वाला हैँ और वो भी हो क्यों ना ज़ब बात अपने स्टार से शुरू होकर स्वयं के स्टारडम पर आकर रुक जाए तो बात का उठना लाजिमी भी हैँ और मेरी कलम आज इसी मुद्दे को ध्यान में रखकर लिखेगी भी मैं मेरी अपनी सोच के हिसाब से ही कार्य करता हूँ और अपने स्टारडम के प्रति समर्पित होकर अपने आपको बनाने व बचाने की भी कोशिश करता हूँ किन्तु परन्तु यदा कदा मुझसे भी गलतियां अवश्य होती हैँ चुकि मैं कोई भगवान नहीं हूँ कि मुझसे गलती नहीं होगी किन्तु जो काम करेगा गलती उसी से होती भी हैँ यहाँ बात हो रही हैँ कि हमसब अपना स्टार कैसे बचाये तो मेरी सलाह सभी अपने पाठकों और शुभचिन्तकों से हैँ कि श्रीमान आप आज से ही स्वयं को देखते हुए कार्य करें चुकि पहले आप में ही सुधार होनी चाहिए तभी सामने वाला भी अपना मंत्वय आपके प्रति कुछ हटकर रखेगा और सोचेगा जबकि अगर आपके अंदर ही उतावलापण व्याप्त हैँ तो सामने वाला भी उत्तेजना से भरपूर ही रहेगा वहीँ अक्सर कई मामलों में हमसब यह भूल जाते हैँ कि आप ने अपने लिए जो बोया हैँ वहीँ आपको आगे चलकर काटना भी होगा यहीं दुनियां का दस्तूर भी हैँ जिस दिन ये बातें आपसबके जेहन में आ जायेगी तो आप जान जाएंगे कि कहाँ गलती हो रही हैँ और कौन गलत हैँ और कहाँ से सुधार करें जिससे कि मैं और मेरा स्टार बरकरार रह सके वहीँ कई मायनों में कुछ लोगों को अपनी जिंदगी सही तरीके से जीने भी नहीं आई हैँ तभी तो एक कहावत उन सबके लीए लिखी गई हैँ कि “संगत से गुण होत हैँ और असंगत से गुण जात “और जो कोई भी इंसान इस टॉपिक को ध्यान में रखकर चलता हैँ तो उसका स्टारडम अवश्य बचता हैँ क्योंकि आपने जो अब तक कमाया हैँ रुपया और पैसा प्लीज आपलोग इसे ना समझे इसकी व्याख्या आप अपने कर्मों को ध्यान में रखकर कर सकते हैँ क्योंकि आपके द्वारा किया गया कर्म ही आपसबों के साथ जाएगा क्योंकि धन तो सब कमाता हैँ किन्तु निर्धन बनकर इस संसार से कोई नहीं जाना चाहता हैँ ये एक कड़वी सच्चाई जिसे हम जीते जी नहीं समझ पाते हैँ और जब अंत नजदीक आता हैँ तब क्षणिक मात्र ही अहसास हो पाता हैँ और हमसब एक क्षणगूर की भांति देखते रह जाते हैँ कि जिंदगी के इस सफऱ में हमसबने किया खोया और किया पाया तो दोस्तों अपने स्टार को पकड़ कर रक्खे और अपने स्टारडम के दम पर इस समाज को एक नए आयाम की ओर लेकर मार्गदर्शित करें जिससे की इस समाज में आपका स्टारडम या आपकी गुडविल एवं आपके छवि में चार चाँद लग जाए, अन्यथा मर्जी हैँ आपकी की आप अपना स्टार कैसे बचाते हैँ और अपने स्टारडम को कैसे सवारते हैँ,
सबों का आभार,
अरुण कुमार – मुख्य संपादक( धनबाद टाइम्स )
(भागवत ग्रुप कारपोरेशन )












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