जनता पस्त, जनप्रतिनिधि मस्त : वार्ड 42 में अभाव और प्रदूषण के बीच चुनावी जंग
*झरिया वार्ड 42 में जनता की पुकार: प्रदूषण, दरारें और विस्थापन के साए में कट रही जिंदगी*
झरिया । धनबाद के झरिया क्षेत्र में स्थित नगर निगम वार्ड संख्या 42 के निवासी इन दिनों गंभीर संकट से जूझ रहे हैं। कोयला खनन प्रभावित इस इलाके में मूलभूत सुविधाओं की भारी कमी, बढ़ता प्रदूषण और विस्थापन का डर लोगों की जिंदगी को मुश्किल बना रहा है। स्थानीय निवासियों के अनुसार बीसीसीएल और आउटसोर्सिंग कंपनियों द्वारा की जा रही हैवी ब्लास्टिंग तथा ओवरबर्डन (ओबी) डंपिंग से उठने वाली धूल और कोयला धूल (कोल डस्ट) का प्रदूषण इतना अधिक है कि सांस लेना तक दूभर हो गया है। घरों की दीवारों में दरारें पड़ गई हैं, जिससे परिवार लगातार खतरे के साए में जी रहे हैं। बच्चे और बुजुर्ग विशेष रूप से प्रभावित हैं, जिसमे सांस की बीमारियां, आंखों में जलन और त्वचा रोग आम हो गए हैं। इसके अलावा साफ पेयजल की कमी एक बड़ी समस्या बनी हुई है। नालियां जाम रहती हैं, जिससे बारिश में गंदा पानी घरों में घुस आता है और मच्छरजनित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। सड़कें टूटी-फूटी हैं, बिजली आपूर्ति अनियमित है। खनन गतिविधियों के विस्तार से वार्ड की सीमा सिमटने या प्रभावित होने की आशंका भी मंडरा रही है, क्योंकि आउटसोर्सिंग कंपनियों की मनमानी और स्थानीय प्रशासन की लापरवाही जारी है। झरिया कोलफील्ड में कोयला खनन से जुड़ी समस्याएं लंबे समय से चली आ रही हैं, जहां भूमि धंसाव, आग और प्रदूषण ने हजारों परिवारों को प्रभावित किया है। वार्ड 42 जैसे क्षेत्रों में ये मुद्दे और गहरा गए हैं, जहां विकास कार्यों में सुस्ती और खनन प्रभावों पर नियंत्रण की कमी साफ दिखाई देती है।
*प्रत्याशी कर रहे कई लुभावने वादे*
वर्तमान में धनबाद नगर निगम चुनाव के मद्देनजर वार्ड 42 से कुल 8 प्रत्याशी मैदान में हैं। मुनिलाल राम, मीनाक्षी देवी, धर्मवीर पासवान, रीना देवी, नीरज पासवान, दुर्गा दास, रुदल पासवान, सुभाष पासवान आदि के समर्थन में जनसंपर्क और अपीलें जारी हैं। सभी ने पानी, बिजली, सड़क, नाली सुधार, सफाई और प्रदूषण नियंत्रण जैसे बड़े-बड़े वादे किए हैं।भाषणों में समाधान, घोषणाओं में राहत और पर्चों में भविष्य उज्ज्वल है, लेकिन जनता का सवाल वही है, क्या ये वादे हकीकत बन पाएंगे, या फिर चुनाव के बाद पुरानी उदासीनता बरकरार रहेगी? वार्डवासी अब थक चुके हैं और उनकी आवाज को सुनना समय की मांग है। प्रशासन, बीसीसीएल और आउटसोर्सिंग कंपनियों से तत्काल कदम उठाने की अपील की जा रही है, ताकि प्रदूषण कम हो, सुविधाएं बहाल हों और विस्थापन के डर से मुक्ति मिले। आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि चुनावी वादे कितने अमली जामा पहन पाते हैं, अन्यथा वार्ड 42 की जनता का संघर्ष और लंबा खिंच सकता है।
संवाददाता — शमीम हुसैन
मुख्य संपादक — अरुण कुमार












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