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एजुकेशन

मकर संक्रांति का पावन पर्व 14 या 15 जनवरी क्यों हैँ आमजनमानस में भ्रम की स्तिथि ??

मकर संक्रांति 14 जनवरी को मनाये या 15 जनवरी को अक्सर भ्र्म की स्थिति आमजन्मान्स के मन में उत्पन्न हो जाती हैँ जबकि आज यह कौतुहल का विषय बन गई हैँ वहीँ इस मामले को लेकर हमारे बिहार के कुलपुरोहित पंडित उमेश शास्त्री अपनी राय में दोनों दिनों को महत्व देने की बात कहते हैँ जबकि इसके विपरीत कई पंडित 15 जनवरी को मकर संक्रन्ति का पर्व मनाने को लेकर कहते हैँ अब कौन किसकी बात माने क्योंकि हमसब ग्रह और नक्षत्र की वेशभूषा को किधर जान पाते हैँ हमें तो बस इतना पता था कि 14 जनवरी को मकर संक्रांति का पर्व होता हैँ और आज तक भी वहीँ परम्परा कायम हैँ चुकि मैं मेरी भावना के साथ सदैव बँधा हुआ रहता हूँ तो मैं कैसे अपनी परम्परा और संस्कृति को भूल जाऊ वहीँ हिन्दू धर्म की मान्यता के अनुरूप
लोहरी पर्व , पोंगल और बिहू का पर्व 13 और 14 जनवरी को मनाए जाते रहेंगे. क्योंकि ये त्योहार तिथि के अनुसार मनाए जाते हैं, न कि हिंदू कैलेंडर में परिवर्तन के अनुसार.
एक मान्यता ये भी
जबकि ज्योतिषाचार्य डॉ. नरेश त्यागी मकर संक्रांति को एक दिऩ आगे बढ़ाए जाने की परंपरा को खारिज करते हैं. उनका कहना है कि मेरे कथन के अनुसार मकर संक्रांति अभी भी 14 जनवरी को ही मनाई जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि जो लोग 14 जनवरी को मकर संक्रांति को मना रहे हैं वो ठीक कर रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि अब हर त्योहार दो दिन मनाया जाने लगा है, ये परंपरा गलत है जबकि दो दिनों का ये मकर संक्रांति का पर्व हो जाने से प्रायः लगभग सभी लोग उहापोह में पड़ जाते हैँ कि किस दिन का पर्व सही रहेगा जबकि हिन्दू शास्त्रों के अनुसार बहुत कुछ नहीं बदलता हैँ अब तो ये सब अपने मानने और ना मानने पर निर्भर करता हैँ कि हम इस पर्व को कब मनाये,वैसे खाना तो चुरा और दही ही हैँ फिर कुछ ना सोचे और दोनों दिन जमकर खाये और हमें भी बुलाये,

अरुण कुमार ( मुख्य संपादक )