*चार दिनों तह चलने वाली महापर्व छठ मंगलवार से प्रारंभ, 36 घंटे की निर्जला उपवास रखेगी व्रती*
जोड़ापोखर । चार दिनों तक चलने वाली लोक आस्था का महापर्व छठ नहाय खाय के साथ आज से प्रारंभ होगी। छठ पूजा हिन्दू धर्म का सबसे प्राचीन त्यौहार में से एक है। यह खासकर बिहार, झारखण्ड, उत्तर प्रदेश और नेपाल के दक्षिणी भागों में विशेष रूप से मनाई जाती है। यह त्यौहार हिंदू कैलेंडर विक्रम संवत में कार्तिक के चंद्र महीने के छठे दिन और दीपावली के छह दिन बाद मनाया जाता है जो शुक्ल चतुर्थी से शुरू होकर कार्तिक शुक्ल सप्तमी पर समाप्त होता है। नहाय खाय के साथ छठ पूजा की शुरुआत होती है और उदयाकालीन अर्घ्य के साथ समाप्त होता है। हिंदू धर्म के सभी व्रत त्यौहार में छठ पूजा को सबसे कठिन माना जाता है, क्योंकि इसमें महिलाएं 36 घंटे का निर्जला व्रत करती है। यह पर्व सूर्यदेव को समर्पित है। छठ पूजा को महिलाओं के साथ साथ मर्द भी रखते हैं। यह पूजा विशेष कर अपने संतानो की सुख समृद्धी और लंबी आयु के लिए किया जाता है। छठ पूजा के पहले दिन नहाय खाय होता है, दूसरे दिन खरना होता है और तीसरे और चौथे दिन शाम और सुबह का आर्ध्य दिया जाता है. इस साल इस छठ महापर्व की शुरुआत 5 नवंबर को नहाय खाय के साथ हो रही है। दूसरा दिन 6 नवंबर को खरना है। इस दिन व्रती महिलाएं पूरा दिन व्रत करती हैं और फिर रात के समय खीर प्रसाद ग्रहण करती हैं। खरना के बाद से ही व्रती महिलाओं का 36 घंटे का निर्जला उपवास आरंभ हो जाता है। तीसरा दिन 7 नवंबर को संध्याकालीन अर्ध्य है, इस दिन संध्या के समय डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। चौथा दिन 8 नवंबर को प्रातःकालीन अर्ध्य के साथ लोक आस्था का महापर्व छठ का समापन हो जाएगा। इस दिन व्रती महिलाओं भोर के समय जल में खड़े होकर सूर्य देव को अर्घ्य देती हैं। अर्घ्य के बाद इसी दिन व्रती महिलाएं छठ व्रत का पारण करती हैं।
संवाददाता – शाहिल हुसैन
मुख्य संपादक – अरुण कुमार 














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