

एक पत्रकार ज़ब किसी चीज को देखता हैँ तो वो उसी को कहता और लिखता हैँ यहाँ बात हो रही हैँ झरिया विधानसभा के अंतर्गत पड़ने वाली सड़कों की तो इस सड़क पर पैदल चलना भी आज दुर्लभ हो गया हैँ क्योंकि सड़क में गड्ढा कहें या सड़क ही नहीं हैँ कमोवेश पुरे क्षेत्र का यही हाल हैँ कहीं सड़क पर पेड़ गिरा हुआ हैँ तो कहीं पूरा जलजमाव हैँ और आमजन मजबूर हैँ कि किसको फरियाद करे यह नजारा होरलाडीह, शिमलाबहाल, बोर्रागढ़, प्योर बोर्रागढ़ के कई जगहों का हैँ ना कोई जनप्रतिनिधि और ना ही कोई इनके कर्ता धर्ता की सड़कें को कौन दुरुस्त करेगा या जनता कब तक ठगी जायेगी किसी के पास कोई जवाब नहीं हैँ तो उपाय कौन करेगा तो सीधा सवाल का जवाब हैँ कि जनप्रतिनिधि जो की जनता से किये गए उनके वायदों को पूरा नहीं करते हैँ और छोड़ जाते हैँ उन्हें उनके इस हाल पर चुकि इस सड़क से मैं स्वयं प्रतिदिन दो चार होता हूँ कई विद्यालय के बच्चे भी इसी सड़क से आवागमन करते हैँ मेरा सीधा सवाल जनप्रतिनिधि से हैँ कि कभी घर हुआ करता था यह बोर्रागढ़ आपका आज बेहाल क्यूँ हैँ???????
बोर्रागढ़ की सड़कें हुई बदहाल











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